डार डार पागन पर
कोयलिया बोले
रुतु बसंत में उमगे
नए रुतु नए फूल
फूल बनके डार देखो
सुध-बुध बिसराई
- राग हंसध्वनी, एकताल
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Tuesday, December 1, 2009
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